सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2025 को रिलीज होने वाली फिल्म उदयपुर फाइल्स की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2025 को रिलीज होने वाली फिल्म उदयपुर फाइल्स की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। यह फैसला अबु बकर की याचिका पर आया, जिसमें दावा किया गया था कि यह फिल्म, जो 2022 में उदयपुर में एक दर्जी की हत्या पर आधारित है, साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ सकती है और चल रहे मुकदमे को प्रभावित कर सकती है।

चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे बी परदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने याचिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) ने फिल्म को मंजूरी दे दी है, और रिलीज पर रोक लगाना एक तरह की प्री-सेंसरशिप होगी।

कोर्ट ने कहा कि बिना यह साबित किए कि फिल्म का कंटेंट नुकसान पहुंचा सकता है, वे रिलीज रोकने का आदेश नहीं दे सकते। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चल रहा मुकदमा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित नहीं करता। याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट में जाने या सिविल मुकदमा दायर करने जैसे अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की छूट दी गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर दखल देने का कोई आधार नहीं पाया।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे बी परदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल थे, ने इस याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने पूछा कि फिल्म की रिलीज को क्यों रोका जाए, जब इसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) ने पहले ही मंजूरी दे दी है। कोर्ट का कहना था कि बिना यह साबित किए कि फिल्म का कंटेंट वास्तव में नुकसानदायक है, रिलीज पर रोक लगाना ठीक नहीं होगा, क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने जैसा होगा।

संक्षेप में, कोर्ट का मानना था कि बिना सबूत के फिल्म पर रोक लगाना सही नहीं है, और यह मामला सीबीएफसी के दायरे में पहले ही सुलझाया जा चुका है। याचिकाकर्ता को अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की सलाह दी गई।

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